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सब ठीक है, कुछ अननैचुरल है, विपक्ष का ‘प्रयोग’ है या कुछ और…

बिहार न्यूज : गजब हो रहा है। शुक्रवार से नालंदा-सासाराम संभाले नहीं संभल रहा। दोनों जगह धार्मिक जुलूस के दौरान दो गुटों में तनातनी, हिंसा, उपद्रव, फायरिंग की घटनाएं हुईं। सासाराम में धमाके अब भी हो रहे। नालंदा में फायरिंग ज्यादा हुई। यहां मौत भी हुई। तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश में बतौर जिम्मेदार मीडिया ‘अमर उजाला’ ने उतनी ही खबरें दिखाईं, जितनी जानकारी  बिहार में रहने वाले या इस राज्य से वास्ता रखने वालों के लिए जरूरी है। लेकिन, यहां हो क्या रहा है? विपक्ष, सरकार और यहां तक कि पुलिस भी पहेली बूझने के लिए लोगों को दे रही है। आगे बढ़ने से पहले इन बयानों को पढ़िए-

बयान 1…यह नैचुरल तो नहीं लगता है

“इस तरह का तो कुछ होता नहीं था। थोड़ा-बहुत कुछ होता था तो तुरंत ठीक हो जाता था। यह नैचुरल (सामान्य) चीज नहीं है। जरूर कोई इधर-उधर किया है। कोई अननैचुरल किया है।”

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार

शुक्रवार की घटना के बाद शनिवार को प्रतिक्रिया

बयान 2…हमारे लोगों पर बम चल रहे

“राज्य सरकार केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम से पहले धारा 144 लगा देती है, क्योंकि सासाराम की स्थिति इनसे नहीं संभल रही। हमारे लोगों पर बम चल रहे, लेकिन  नीतीश सरकार तुष्टीकरण में लगी हुई है।”

सम्राट चौधरी, नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधान परिषद्

शुक्रवार की हिंसा पर शनिवार को प्रतिक्रिया

बयान 3…उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे

“सासाराम और नालंदा की बिगड़ी कानून-व्यवस्था को लेकर राज्यपाल से बात की तो जदयू अध्यक्ष ललन सिंह को बुरा लग गया। मैं भारत का गृह मंत्री हूं और बिहार इस देश का अहम हिस्सा है। मेरी चिंता वाजिब है। हम सरकार में आए तो दंगा करने वाले लोगों को उल्टा लटका कर सीधा करेंगे।”

अमित शाह, गृह मंत्री, भारत सरकार

शुक्र-शनिवार की हिंसा पर रविवार को जनसभा में

बयान 4…शांति में खलल का प्रयास विफल

“यह निश्चित तौर पर एक प्रयास था राज्य की अमन शांति को

प्रभावित करने का, जिसे पुलिस-प्रशासन ने मिलकर विफल किया है। हम पूरी तरह कॉन्फिडेंट हैं कि आगे हम ऐसी घटना नहीं होने देंगे।”

आर. एस. भट्ठी, डीजीपी, बिहार

शुक्रवार-शनिवार की घटना पर रविवार को प्रतिक्रिया

बयान 5….भाजपा बौखलाई, उसी का प्रयोग है

“बिहार में सद्भाव बिगाड़ने की संघी कोशिश पर बिहार सरकार की पैनी नज़र है। जिन राज्यों में BJP कमजोर है, वहां बौखलाई हुई है। भाईचारे को तोड़ने के किसी भी भाजपाई ‘प्रयोग’ का हमने हमेशा माकूल जवाब दिया है और देते रहेंगे।”

तेजस्वी यादव, उप मुख्यमंत्री बिहार

शुक्र-शनिवार की हिंसा पर रविवार को प्रतिक्रिया

इस असामान्य ने पहले दस्तक दी थी

यह सामान्य हो या नहीं, लेकिन पहला सवाल यह है कि सरकार और उसका तंत्र आखिर क्या कर रहा था। उसे 30 तारीख को सीवान में सामने आई घटना से जागना चाहिए था, जब निर्धारित रूट छोड़ एक खास गली में घुसने पर उपद्रव हो गया था। कोई बड़ी घटना होने के पहले एक ‘दस्तक’ सुनाई देती है। यह वही दस्तक थी कि तनाव है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले भी एक्टिव हैं। लेकिन, पुलिस को कुछ पता नहीं था। सरकार की कोई तैयारी नहीं थी।

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बम किसी पर नहीं, बिहारियत पर है

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए बिहार विधान परिषद् के नेता प्रतिपक्ष का बयान भी अजूबा है। शुरुआत किसने की, यह जांचना सरकार का काम है लेकिन हकीकत यही है कि बम किसी धर्म-जाति पर नहीं इंसानियत पर फेंके जा रहेे। बिहारियत पर बमबाजी हो रही है। कहने को हर कोई कह रहा कि हमारे ऊपर बम फेंके जा रहे हैं,  बस किसी के पास बोलने का फोरम है और कोई सोशल मीडिया पर भड़ास निकाल कर रह जा रहा है। सत्ता, विपक्ष, धर्म जैसे दायरों को भूलकर बिहारियत को बचाने के लिए हर आदमी को सबूत देना चाहिए कि कौन सौहार्द बिगाड़ रहा। लेकिन, ऐसा होता दिख नहीं रहा।

चिंता दिखाने की जगह चिंता करने का वक्त

सासाराम-नालंदा में बड़ी घटनाएं हुईं, वैसे कई जिलों में छिटपुट घटनाओं को बड़ा दिखाने का खेल भी चला। इसमें किसी आम आदमी का चिंतित होना लाजिमी है, लेकिन खास लोगों के लिए यह चिंता करने का वक्त है। सेना की जरूरत थी तो सेना लगाते। सेंट्रल इंटेलिजेंस लगाकर गलत को गलत और सही को सही किया जाता तो भी बात बनती। लेकिन, राजनीति ज्यादा हो रही है और काम कम। नतीजा यह है कि कुछ संभलता नहीं दिख रहा।

मुख्यमंत्री का गृह जिला ऐसे संभाल रहे तो…

बिहार से बाहर लोग नालंदा को इतिहास के लिए जानते होंगे, लेकिन बिहारियों के लिए इसका वर्तमान ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री का गृह जिला है। राजधानी पटना से 100 किलोमीटर भी दूरी नहीं है, जहां इतना हंगामा बरपा कि आग बुझाने में 24 घंटे लग गए। आग बुझी भी तो गंध जाने के पहले फिर फायरिंग से बारूद का धुआं। उसके बाद भी पुलिस का कहना कि पुलिस-प्रशासन ने काबू कर लिया, चौंकाता है। खासकर तब भी, जब किसी घर का चिराग भी इस आग में ही बुझा हो। कितना भी रोकें, लेकिन अब लोग लिखने लगे हैं- राज्य मुख्यालय से जाकर भी नालंदा को संभाला जा सकता था, क्यों नहीं हुआ?

प्रयोग तो साबित करने की चीज है, इंतजार है

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इशारे में और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सीधे-सीधे कहा कि बिहार की शांति भंग करने का यह प्रयोग विपक्ष ने किया है। तो, अब यह आवाज भी उठने लगी है कि प्रयोग का प्रमाण सामने लाया जाना चाहिए। विज्ञान में प्रयोग कर कोई भी बात साबित की जाती है। यहां अगर सत्ता को लग रहा कि शांति बिगाड़ने के लिए भाजपा ने हिंसा का प्रयोग किया है तो सरकार को प्रमाण लेकर आना चाहिए। सोशल मीडिया पर यह आवाज भी अब तेज हो रही है कि आरोपों से काम नहीं चलेगा, बिहार को संभालना होगा। और, संभालने के पहले एक-दूसरे पर आरोप लगाने वालों को प्रमाण लेकर आना चाहिए।

सोर्स लिन्क

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